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सुकून की तलाश

मनुष्य जीवन में सच्चे सुकून और शांति की तलाश में भटकता रहता है। कभी उसे लगता है कि किसी स्थान या व्यक्ति के पास पहुँचकर …

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गुरु दीक्षा और जीवन का मार्गदर्शन

गुरु दीक्षा का अर्थ केवल किसी गुरु से मंत्र या शिक्षा लेना नहीं है, बल्कि साधना, ज्ञान, अनुशासन और सही जीवन-पथ का मार्गद…

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गुरुजनों को नमन

गुरुजन केवल शिक्षा ही न दें, बल्कि ऐसी सजग और विवेकपूर्ण चेतना का विकास करें जिससे मनुष्य जीवन और समाज की विभिन्न परिस्थ…

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एकजुटता से वैश्विक परिवर्तन

जो लोग स्वयं को पूर्ण और सक्षम मानते हैं तथा दुनिया में सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहते हैं, उन्हें मिलकर एकजुट होना चाहिए…

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स्वतंत्र सोच की आवश्यकता

हर व्यक्ति की सोच अलग होती है। हम जो बात सबके सामने या सभी परिस्थितियों में सही समझते हैं, जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति भी उ…

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भयमुक्त समाज की स्थापना

हमें ऐसी व्यवस्था और समाज का समर्थन करना चाहिए, जहाँ हर नागरिक बिना भय और हिंसा के सुरक्षित जीवन जी सके। किसी भी व्यक्ति…

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सर्वांगीण विकास और अधिकार

मनुष्य और समाज के हर पहलू को व्यापक समझ के साथ देखकर ही वास्तविक विकास संभव है। इसलिए संवैधानिक, मनोवैज्ञानिक और मौलिक अ…

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सर्वव्यापी संज्ञान से नवसृजन की ओर

यदि व्यक्ति समाज और जीवन के सभी पक्षों को व्यापक दृष्टि से समझते हुए निरंतर गतिशील रहना चाहता है, तो उसे केवल अपनी सीमित…

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संज्ञान से व्यवस्था-सुधार की ओर

समाज में उठने वाले प्रश्न यदि केवल विरोध का कारण न बनकर चिंतन और संवाद का आधार बनें, तो वे व्यवस्था को बेहतर बनाने की शक…

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सतत जागरूकता और आत्मपरीक्षण

जीवन में विकास तभी संभव है, जब हम समय-समय पर स्वयं से पूछें—क्या मेरी सोच स्पष्ट है? क्या मेरा ज्ञान शुद्ध और तथ्यपूर्ण …

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सभ्य समाज की ओर

किसी समाज के सभ्य होने की पहचान केवल उसकी आधुनिकता या विकास से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वहाँ न्याय, संवेदनश…

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जाल जी का जंजाल और चैतन्य हल

जब कोई व्यवस्था अपने ही बनाए हुए जाल में फंस जाती है ,तब उसे एक नई दृष्टि, नई सोच और नए तरीके की जरुरत होती है उस जाल से…

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