सर्वव्यापी संज्ञान से नवसृजन की ओर

सर्वव्यापी संज्ञान से नवसृजन की ओर
यदि व्यक्ति समाज और जीवन के सभी पक्षों को व्यापक दृष्टि से समझते हुए निरंतर गतिशील रहना चाहता है, तो उसे केवल अपनी सीमित सोच तक नहीं रुकना चाहिए। यहाँ “सर्वमनोभूमियों के धरातल पर सार्वभौमिक संज्ञान” का आशय है—मनुष्य और समाज की विभिन्न मानसिक, सामाजिक एवं वैचारिक अवस्थाओं को व्यापक रूप से समझना।
“जीवंत राष्ट्रकमांडर” उस जागरूक नागरिक का प्रतीक है, जो केवल परिस्थितियों का दर्शक नहीं, बल्कि सजग होकर राष्ट्र और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाता है|
व्यापक समझ विकसित करो, नई संभावनाओं को पहचानो, रचनात्मक परिवर्तन के लिए निरंतर सक्रिय रहो—यही एक जागरूक और जीवंत नागरिक की पहचान है
← सभी पोस्ट देखें