गुरुजनों को नमन

गुरुजनों को नमन
गुरुजन केवल शिक्षा ही न दें, बल्कि ऐसी सजग और विवेकपूर्ण चेतना का विकास करें जिससे मनुष्य जीवन और समाज की विभिन्न परिस्थितियों को समझकर सचेत, जागरूक और विवेकशील बना रहे।
गुरु का ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह आने वाली पीढ़ियों में चेतना, समझ और विवेक का प्रकाश बनकर पहुँचे।
← सभी पोस्ट देखें