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जैसी हमारी दृष्टि, वैसी मानसिक सृष्टि

जैसी हमारी दृष्टि, वैसी मानसिक सृष्टि
हमारी जो मानसिक सृष्टि है वो सिर्फ हमारे पेशे पर ही निर्भर नहीं होती बल्कि इस पर भी निर्भर होती है कि हमारा परिवार, संस्कार, संस्कृति, अध्ययन, जीवन संघर्ष, मूल आदर्श कैसे है क्योंकि इनका भी हमारे जीवन और मानसिकता पर गहरा असर होता है |
संघ प्रशासक
श्रीचैतन्यराष्ट्र संघ
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